॑सृजन

भ्रष्ट समाज का उत्कर्ष करो !
जीवन है संघर्ष संघर्ष करो !!

मिटा डालो उग्रता के निशां,
बदल डालो भ्रमित समाज,
नींव बनो तुम युवा शक्ति,
जला डलो ये रिती रिवाज़ !

उखाड फ़ेंको उग्रवाद को,
बन जाओ तुम कर्णधार,
खोई मानवता को जगा लो,
हर इंसा करे पुकार !
खंण्डित कर दो उस समाज को,
जिसमे जलती कोई अबला हो,
ना हों जिसमें वर्ण विचार,
हर इन्सां बस इन्सां हो !

कसम है तुमको युवा शक्ति,
“॑सृजन”करो तुम समाज,
फिर बनो ॑कृष्ण कोई ,
अर्जुन बन जाओ तुम आज !

भ्रष्ट समाज का उत्कर्ष करो !
जीवन है संघर्ष संघर्ष करो !!
****धर्मेन्द्र कुमार् रविकुल् “नाशाद****

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